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‘ शिक्षा ” को बचाने कि लड़ाई लड़नी होगी समाज को – वरुण पांडेय

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मोतिहारी शहर के जाने माने शिक्षाविद् और प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ऑफ टीचर्स वेलफेयर के नगर कोषाध्यक्ष वरुण कुमार पाण्डेय ने शिक्षा क्षेत्र में हो रही लगातार कमी को गंम्भीर मुद्दा माना है साथ ही इसपर अपनी प्रतिक्रिया भी दी है वरुण कुमार के अनुसार आज विगत तीन वर्षो से बच्चे घर पर बैठे है जो इस सदी के लिए गंभीर समस्या है जिन छोटे बच्चों का 2020 में नामांकन होना था वो अब भी प्रारंभिक शिक्षा से दूर है और आज उनकी उम्र भी बढ़ गई है बाद में यही बच्चो जब प्रारंभिक शिक्षा के बिना ऊपर वाले वर्ग में जाएंगे तो उनका पूरी तरह से बौद्धिक विकास नहीं हो पाएगा और वो बच्चे पढ़ाई से भागेंगे जो इस पीढ़ी के लिए चिंता का विषय है साथ साथ जिन बच्चो का दसवीं और बारहवी का अभी परीक्षा हो रही है या देना है वो बच्चे पिछले तीन वर्षो से विद्यालय का मुंह नहीं देखे तो आप सोच सकते है कि वो क्या पढ़े है अगर सरकार की नरम शिक्षा नीति के कारण बच्चे परीक्षा पास भी कर गए तो उनको नौकरी कोंन देगा। वो किसी बड़े प्रतियोगिता परीक्षा को कैसे पास कर पाएंगे इसका उत्तर ना में है इस पीढ़ी के बच्चो का शारीरिक विकास तो हुआ है।

 

लेकिन मानसिक और बौद्धिक नहीं ये सब सरकार की उदासीनता का परिणाम है और आज कल के अभिभावक भी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे जो हमारे समाज के लिए दुखद है । आज चुनाव हो रैली हो, बाजार हो, कुभ मेला हो , लोकसभा, राज्यसभा की कार्यवाही या अन्य सार्वजानिक जगहों को खोल दिया गया लेकिन विद्यालय अब भी बन्द है जो एक गंभीर विषय है और इसका गंभीर परिणाम आने वाले समय में बच्चों को झेलना होगा जिस पर सरकार आंखे बन्द किए सोई है क्यों कि सरकार के पास नौकरी है ही नहीं देने को तो सरकार क्यों चाहेगी की बच्चे पढ़े और आगे नौकरी के लिए समस्या खड़ी करे। ये पीढ़ी बेरोजगार रहेगी तो सरकार को भी फायदा होगा इनकी रैलियों में भीड़ और झंडा उठाने का काम तो करेगी।।

 

आज सरकार प्राइवेट स्कूल जो शिक्षा के अभिप्राय है उनको बन्द कर देना चाहती है नए नए नियमों को स्कूलों पर लाद कर, हजारों प्राइवेट स्कूल बन्द हो गए हजारों शिक्षक बेरोजगार हो कर अपने मूल पेसा को छोड़ मजदूरी कर रहे या कोई अन्य जगह काम कर रहे ये सभी चीजे एक सोची समझी रणनीति के तहत सरकार कर रही है। जिसपर समाज को सोचना होगा और शिक्षा को बचाने की लड़ाई लड़नी होगी।

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