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सारण: टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में अब सीएचओ भी बनेंगे भागीदार

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बिहार न्यूज़ लाइव डेस्क:

• हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत सीएचओ करेंगे टीबी रोगियों की पहचान
• निक्षय मोबाइल एप के बारे में दी गयी जानकारी

छपरा,20जुलाई । जिले को टीबी मुक्त बनाने के दृढ़ संकल्प को पूरा करने में स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से जुटा है। इसके तहत जिले के आयुष्मान भारत-हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गयी है। यक्ष्मा के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी के निर्देश पर जिले के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत सीएचओ को टीबी रोगियों की पहचान, जाँच, उपचार, निक्षय पोषण योजना के तहत डीबीटी, काउंसिलिंग और सामाजिक सहयोग प्रदान करने का बड़ा जिम्मा सौंपा गया है। इसको लेकर सदर अस्पताल के जीएनएम स्कूल में एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. रत्नेश्वर प्रसाद ने बताया कि आयुष्मान भारत-हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत सीएचओ भी टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में भागीदार बनेंगे। कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) टीबी के संभावित मरीजों की स्क्रीनिंग भी करेंगे।

 

 

अगर किसी मरीज में टीबी के लक्षण दिखाई देते हैं तो बलगम की जांच के लिए उन्हें अस्पताल रेफर करेंगे। टीबी मरीजों की सूचना को संकलित करेंगे और सैम्पल की रिपोर्ट को अपडेट करेंगे। टीबी की पुष्टि जिन मरीजों में होगी उनको उपचार के लिए सीएचओ प्रेरित करेंगे। इसके लिए कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) को प्रशिक्षित किया गया है। सीडीओ डॉ. रत्नेश्वर प्रसाद, एनसीडीओ डॉ. भूपेंद्र कुमार, डीपीएम अरविन्द कुमार, डीपीसी रमेशचंद्र कुमार, डीएमएंडईओ ब्रजेश कुमार, जपाईगो कीप्रोग्राम ऑफिसर बीनानी मिश्रा, डीपीसी टीबी हिमांशु शेखर समेत अन्य मौजूद थे।

 

 

कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर पर बड़ी जिम्मेवारी-

हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में टीबी रोगियों की सुविधा के लिए गुणवत्तापूर्ण सेवाओं के साथ-साथ टीबी को लेकर मनोवैज्ञानिक, सामाजिक सपोर्ट भी उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कार्यरत कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) पर बड़ी जिम्मेवारी है कि- वह घर के दरवाजे से बाहर आ रहे लोगों को बेहतर ढंग से टीबी की जांच और इलाज के साथ-साथ इससे बचने के लिए टीबी के लक्षण और सावधानियों के बारे में अच्छी तरह से जागरूक करें।

 

टीबी उन्मूलन के लिए किये जा रहे विभिन्न उपाय-
जिला यक्ष्मा पदाधिकारी ने बताया कि जिला अस्पताल से प्रखंड स्तर के स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी के मरीजों की जांच और इलाज की नि:शुल्क सुविधा उपलब्ध है। दवा भी मुफ्त दी जाती है। उन्होंने बताया कि जिले में टीबी रोग की रोकथाम के विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं। टीबी एक संक्रामक बीमारी है। इसे जड़ से मिटाने के लिए हम सभी को इसके खिलाफ लड़ाई लडऩे की जरूरत है। उन्होंने टीबी मरीजों से अपील की है कि वह अपना इलाज बीच में ना छोड़ें। कोई भी हमारे परिवार में या आस-पास में टीबी संभावित व्यक्ति दिखाई देता है या ऐसा लगता है कि उसको टीबी हो सकती है, तो उसकी जांच अपने किसी भी आसपास के सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर करानी चाहिए।

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