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मुंगेर: आस्था से खिलवाड़, मां शक्ति की आराधना के बाद पूजा का कचरा गंगा में प्रवाहित, छठपूजा के पूर्व गंगा मैया को करें स्वच्छ

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बिहार न्यूज़ लाइव /मुंगेर से निरंजन कुमार की रिपोर्ट मुंगेर डेस्क: भारतीय संस्कृति के आस्था का आधार मां गंगा प्राचीन काल से मानव सभ्यता के बीच में रही है मानव के जीवन में आयोजित 16 संस्कारों में मां गंगा के जल का अहम योगदान रहता है सनातन धर्म की प्रतीक मां गंगा के प्रति लोगों का आस्था है जीवन के हर शुभ कार्य में मां गंगा का नमन किया जाता है ऐसी महिमा से भरी मां गंगा को आज के सभ्य लोग पूजा का सामग्री कचरा डालकर गंदा कर रहे हैं l

शहर में नवरात्र समाप्ति के पश्चात दशमी पूजा को स्थानीय सोझी घाट ,बबुआ घाट में शहर के पूरे मंदिरों का कचरा जहां देवी प्रतिमा मां दुर्गा का पूजा अर्चना हुआ सभी कचरा को गंगा नदी में डाला जा रहा है राष्ट्रीय कार्यक्रम नमामि गंगा के तहत स्पीयर हेड निरंजन कुमार ने लोगों को मां गंगा में कचरा बहाने से मना किया बावजूद कुछ लोगों को मां की आस्था मां का वास्ता दिया गया तो कुछ लोग कचरा नहीं फेंके बबुआ घाट स्थित कचरा स्थल पर कचरा फेंके वहीं, कुछ लोग जबरन पूजा का सामग्री गंगा में प्रवाहित कर दिए निरंजन कुमार ने लोगों को समझाया जागरूक किया बावजूद पढ़े लिखे लोग जो समाज को नई दिशा और दशा दिखाते हैं!

वैसे लोग मां गंगा में कलश विसर्जन के साथ पूजा का कचरा प्रवाहित करते दिखेl मालूम हो कि सितंबर माह में युवा एवं खेल मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय कार्यक्रम नमामि गंगा के अंतर्गत नेहरू युवा केंद्र के माध्यम विभिन्न स्थानों पर गंगा किनारे रहने वाले युवक और युवतियों को गंगा की स्वच्छता को लेकर गंगा दूत के रूप में प्रशिक्षण दिया गया लोगों ने शपथ लिया की मां गंगा को स्वच्छ रखने की पहल करेंगे l प्रमुख बाजार किराना पट्टी की अंजना देवी बताती है कि सप्तमी सती पूजा को कष्टहरनी घाट में स्नान करने में काफी समस्या का सामना करना पड़ा एक मरा हुआ जानवर का सड़ा हुआ शरीर घंटों नदी किनारे धार पर घूमता घाट किनारे लग जाता था जिस कारण पूजा अर्चना में परेशानी आई विडंबना ही है कि जिस गंगा की पवित्रता आस्था को ले आए दिन माताएं मां गंगा की पूजा करती है उसी गंगा को हम मानव गंदा करते जा रहे हैंl सत्यनारायण भगवान के पूजा में गंगाजल में ही प्रसाद बनाया जाता है मां गंगा में कचरा फेंकने वाले उसी प्रसाद को कैसे ग्रहण करते होंगे l

 

आने वाले महान पर्व छठ पर्व का खरना के दिन प्रसाद के रूप में खीर इसी गंगाजल में बनाया जाता है l जिस गंगाजल को हम गंदा कर रहे हैं उसी का सेवन हम प्रसाद के रूप में करते हैंl जागरूक एवं व्यवहार परिवर्तन की जरूरत है अन्यथा ऐसी गलती हम सदैव करते आएंगे जो हमारे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध होगा l आने वाले छठ पर्व की महानता को लेकर हम सभी का कर्तव्य है कि मां गंगा को गंदा होने से बचाएं उस में कचरा नहीं डालें l

 

 

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