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हाजीपुर: महनार में माटी के रंग कार्यक्रम में लोक कलाओं की रंगारंग प्रस्तुति

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बिहार न्यूज़ लाइव /डॉ० संजय( हाजीपुर)- डेस्क : उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा कला, संस्कृति एवं युवा विभाग, बिहार सरकार एवं जिला प्रशासन,वैशाली के सहयोग से महनार अमरदीप सिनेमा हॉल में ‘माटी के रंग’ कार्यक्रम के तहत छ: राज्यों के लोक कलाकारों ने किया अपने कला का प्रदर्शन किया।

 

इस अवसर पर मुख्य अतिथिअनुमंडल पदाधिकारी, सुमित कुमार,विशिष्ट अतिथि एस. डी. पी. ओ. महनार सभापति नगर परिषद व कार्यक्रम प्रभारी अजय गुप्ता वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओमप्रकाश ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। मंच संचालन करते हुए केंद्र के कार्यक्रम अधिशासी- सह-कार्यक्रम प्रभारी, अजय गुप्ता ने बताया कि उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के अंतर्गत सात राज्य आते हैं – बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उतराखंड, दिल्ली, और हरियाणा जिसका मुख्य कार्यालय प्रयागराज में है।

एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत त्रिपुरा बिहार का जोड़ी राज्य है जो अपना आकर्षक होजागिरि नृत्य के साथ इस कार्यक्रम में शामिल है। कार्यक्रम का शुभारंभ मध्य प्रदेश से आए प्रहलाद कुर्मी एवं दल द्वारा राई नृत्य की प्रस्तुति के साथ किया गया। राई नृत्य जो कि पुत्र जन्म, विवाह एवं मनौती पूर्ण के अवसर पर किया जाता है । मृदंग, नगरिया, झूला रखकर मंजीरा,बांसुरी एवं ढपला वाद्य यंत्र उसमें बजाए गए । दूसरी प्रस्तुति अभय सिन्हा एवं दल बिहार द्वारा छ: मासा झूमर नृत्य की हुई । तीसरी प्रस्तुति हीराराम एवं दल राजस्थान द्वारा घूमर नृत्य की दी गई , जिसको दर्शकों ने बहुत सराहा।चौथी प्रस्तुति देवभूमि उत्तराखंड से आए प्रकाश बिष्ट एवं दल की घसियारी नृत्य की रही। जिसका मधुर पहाड़ी संगीत और आकर्षक सुंदर वेशभूषा ने सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया । पांचवी प्रस्तुति पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा से आए कलाकारों द्वारा होजागिरी की हुई। एक भारत श्रेष्ठ भारत के अंतर्गत एन. सी. जेड. सी. सी.,प्रयागराज के प्रतिभागी राज्य बिहार का जोड़ी राज्य त्रिपुरा से मिनंदा एवं दल द्वारा होजागिरी की बहुत ही मनोरम प्रस्तुति दी गई। इसमें घड़े पर खड़े होकर सिर पर बोतल रखकर नृत्य करते देख दर्शकों ने तालियों के साथ भरपूर साथ दिया। उसके बाद बिहार का छमासा झूमर , उत्तराखंड का घसियारी नृत्य जिसमें दिखाया गया कि पहाड़ों पर रहने वाले लोगों का जनजीवन कैसा होता है।

 

महिलाएं घास काट कर लाती हैं उस समय मनोरंजन करते हुए गीत गाती हैं । बुंदेलखंड उत्तर प्रदेश से आए धर्मेंद्र कुमार एवं दल द्वारा सैरा नृत्य की प्रस्तुति हुई । ऐसी मान्यता है कि जब पांडव अज्ञातवास के दौरान जंगल में सहरिया आदिवासी से संपर्क में आए तब सहरिया जाति के लोगों ने उनके सम्मान में यह नृत्य किया व सहरिया जाति के नाम पर ही इसका नाम सैरा नृत्य हुआ। युवक-युवती गोलाकार घेरे में एक हाथ में डंडा और दूसरे हाथ में मयूर पंख लेकर इस नृत्य को करते हैं । कार्यक्रम में अंतिम प्रस्तुति राजस्थान के भंवई नृत्य से हुई। सिर पर हाथ रखकर भंवई कलाकार द्वारा अत्यंत सुंदर नृत्य किया गया ।

 

राजस्थान की दोनों प्रस्तुति देख मंत्रमुग्ध हो गए।इस श्रृंखला कार्यक्रम की रूपरेखा उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज के निदेशक प्रोफेसर सुरेश शर्मा द्वारा तैयार की गई है। मनोज कुमार द्वारा कार्यक्रम का संयोजन किया गया।माटी के रंग कार्यक्रम के प्रभारी अजय गुप्ता द्वारा बहुत ही विस्तार से इस कार्यक्रम के विषय में बताया गया । उन्होंने ज्ञात करवाया कि नौ दिवसीय माटी के रंग श्रृंखला कार्यक्रम का आगाज़ भोजपुर जिले के आरा से हुई । उन्होंने बताया कि जिला वैशाली के तीन विभिन्न स्थानों – हाजीपुर, महनार और महुआ में इस श्रृंखला कार्यक्रम की प्रस्तुति की जायेगी। जिसका भव्य समापन महुआ में किया जायेगा।

 

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