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अकबरनगर की माँ दुर्गा है शक्ति शाली ,भक्तो की मनोकामनाएं करती है पूरी

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-1952 से स्थापित की जा रहा है माँ दुर्गा की प्रतिमा

बिहार न्यूज़ लाइव /अकबरनगर डेस्क : मोहित कुमार अकबरनगर बाजार स्तिथ माँ दुर्गा मंदिर भक्तो के आस्था का केंद्र है।यहाँ हर साल माँ की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना की जाती है।पूर्वजों द्वारा कहा जाता है कि माँ के दरबार में जो भी भक्त सच्चे मन से आराधना करते है।उन्हें माँ खाली हाथ नही जाने देती हैं।आज तक माँ के दरबार से कोई खाली हाथ नही गया है।

 

अकबरनगर की माँ दुर्गा बहुत ही शक्तिशाली है।यहाँ भक्त नों दिन तक आराधना करते है।लोगो का कहना कि पहले यहाँ पूजा नही होती थी।लेकिन एक पुजारी को मॉ दुर्गा ने सपने में पूजा करने को कहा।जिसके बाद पुजारी दो और लोगो के साथ मिलकर माँ की प्रतिमा स्थापित की।कहा जाता है कि पहली बार जब मां की पूजा अर्चना की ग़यी थी,उसी उसी दौरान ही फल मांगने को कहा गया लेकिन उन्होंने उस समय मां दुर्गा से कुछ नहीं मांगा।जिसके बाद से धीरे-धीरे मां की पूजा अर्चना शुरू कर दी गई।जो आज तक भक्त माँ के पूजा अर्चना में लीन है।बता दे कि अकबरनगर बाजार में मां दुर्गा की प्रतिमा सन 1952 से स्थापित की गई थी ।तब से पूजा अब तक जारी है।

 

जिस समय प्रतिमा स्थापित की गई थी उस समय माँ दुर्गा की मंदिर का निर्माण नही किया जा सका था।जिसके बाद समाज के बुद्धिजीवी लोगो के अथक प्रयास से 1962 में मंदिर का निर्माण कराया गया था।लोगो का मानना था कि दुर्गा स्थान के मंदिर निर्माण में भक्त छेदी झा का काफी योगदान रहा था। उसी के अथक प्रयास से मंदिर के नीव रखी जा सकी थी। आज भी उस महंत की यादें को सजो कर रखे गए हैं ।इस मंदिर में साल में दो बार प्रतिमा स्थापित की जाती है। साथ ही श्रद्धालुओं के लिए आकर्षक ढंग से सीन तैयार कर दिखाया जाता है ।खासकर नवमी और दशमी तारीख को अकबरनगर में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ लगती है।माँ के दर्शन के लिए दूर दराज से भक्त आते है।खासकर मंदिर में डलिया चढ़ाने की अलग परंपरा है।अकबरनगर के बाद ही आसपास में प्रतिमा स्थापित किए जाने लगे।हालाकि कोरोना काल मे दो बार मंदिर परिसर के मेला नही लगा।लेकिन इस बार धूमधाम से दुर्गा पूजा समारोह करने के तैयारी में समिति जुटी हुई है।

आसपास कर लोगो ने चंदा इकट्ठा कर मंदिर बनाने की उठायी बीड़ा

अकबरनगर बाजार स्तिथ दुर्गा मन्दिर 70 साल पुराना हो गया था।जिससे भक्तो को छोटी जगहों में पूजा करने में परेशानी होती थी।पुरानी मंदिर होने के कारण आसपास के कई गांव के लोगो ने एक भव्य दुर्गा मंदिर बनाने का बीड़ा उठाया ।और नए मंदिर निर्माण की नींव रख दी।जिसके एक साल बाद बुद्धिजीवियों के सहयोग से मंदिर निर्माण कार्य पूरा कर दिया।इस मंदिर बनाने की बीड़ा ने एक जुटता व भाई चारे के एक मिशाल कायम किया है।

 

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