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बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव की आहट

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बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है।तथाकथित समान विचारधारा वाले दलों में स्वार्थ पूर्ति के लिए मतभेद बढ़ चुके हैं।एक बार फिर राजनेता और राजनीतिक दलों ने अपने हितों की रक्षा के लिए नए विचारधारा को आत्मसात करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।पिछले कुछ महीनों से अपनी ही गठबंधन की सरकार पर हमलावर रहे लोजपा प्रमुख चिराग पासवान की पहले भाजपा अध्यक्ष से मुलाकात और फिर जाप प्रमुख पप्पू यादव से घंटों की मुलाकात के बाद प्रदेश में नए राजनीतिक समीकरण की संभावना प्रबल हो चुकी है।इसमें कोई शक नहीं कि सत्ता के लिए फूंक-फूंक कर चाल चलने वाली भारतीय जनता पार्टी बिहार में नीतीश कुमार के लिए विरोध को भांप चुकी है।

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राजनीतिक विश्लेषक अनुभव सिंह
राजनीतिक विश्लेषक अनुभव सिंह

 

भाजपा ये समझ रही है कि प्रदेश के वर्तमान हालात में जबकि जनता नीतीश सरकार से नाराज है,चुनाव में भाजपा को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।वहीं गठबंधन की अन्य घटक लोजपा को भी नीतीश सरकार की गिरती साख से नुकसान का भय सता रहा है।लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी नीतीश कुमार से पिंड छुड़ाना चाह रही है।लेकिन भाजपा सत्ता से दूर भी नहीं रहना चाहती।भाजपा को हमेशा जदयू का राजद के साथ गठबंधन का डर रहता है और एक मात्र यही वजह है कि भाजपा अब तक जदयू कि पिछलग्गु बनने को मजबूर है।लेकिन आखिर ऐसा कब तक चलने वाला है।केंद्र में प्रचंड बहुमत पाने वाली भाजपा आखिर कब तक बिहार में पिछलग्गु बन कर रहे।ये सवाल हर भाजपा नेता और कार्यकर्ता को झकझोर रही है।दबी जुबान में भाजपा का हर छोटा-बड़ा नेता,हर कार्यकर्ता, नीतीश कुमार से पिंड छुड़ाने की बात करता है।प्रदेश में नए संभावनाओं की तलाश में चिराग पासवान लगातार प्रदेश सरकार के खिलाफ बयान दे रहे हैं।इसके पीछे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

 

जैसे-जैसे विधानसभा का चुनाव निकट आ रहा है,चिराग पासवान और अधिक आक्रामक होते जा रहे हैं और आरपार के मूड में नजर आ रहे हैं।चिराग इस बात को अच्छी तरह समझ रहे हैं कि लोजपा के पास प्रदेश में खोने के लिए कुछ भी नहीं है।संभव है भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने ही चिराग को बिहार में नए साथियों की तलाश करने और शायद जदयू से अलग विकल्प तलाशने का जिम्मा सौंपा हो।जाप प्रमुख से चिराग पासवान की घंटों की मुलाकात इसी की एक कड़ी नजर आ रही है।आने वाले विधानसभा चुनाव में जाप के अलावा प्रदेश के कई अन्य छोटे-छोटे दल हम,रालोसपा,प्लूरल के भी इस नए विकल्प में शामिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।दूसरी ओर जदयू एक बार फिर राजद से गठबंधन कर लेती है तो भी नीतीश कुमार की कुर्सी खतरे में ही नजर आती है।हो न हो राजद के मुख्यमंत्री होने की शर्त पर ही अब राजद का जदयू से गठबंधन हो।प्रदेश में बहने वाली राजनीतिक हवा नीतीश कुमार के प्रतिकूल नजर आ रही है।प्रदेश की राजनीति जिस तरह करवट ले रही है,ऐसे में नीतीश कुमार के लिए कुर्सी बचा पाना नामुमकिन लगता है।जदयू नेता भी अति उत्साह में नजर आ रहे हैं और चिराग को हल्के में लेने की भूल कर रहे हैं।उन्हें ये नहीं भूलना चाहिए कि चिराग पासवान राजनीति के महान मौसम वैज्ञानिक रामविलास पासवान के पुत्र हैं।

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