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झुग्गी झोपड़ी व फुटपाथी दुकानदारों के मांगों को लेकर सड़क पर उतरे:- मांझी

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संजीव कुमार /बिहार 

पटना  : 23 सितंबर ,रविवार को हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (से0) के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के नेतृत्व में आश्रय अभियान के निर्देशिका सचिव सिस्टर डौरोथी फर्नांडिस के आह्वान पर विस्थापित झुग्गी झोपड़ी और दुकानदारों की समस्याओं को लेकर हजारों हजार की संख्या में महिलाओं एवं पुरुषों ने कारगिल चौक गांधी मैदान से राजभवन तक का शांति मार्च निकाला | विस्थापित झुग्गी झोपड़ी व फुटपाथ दुकानदार की मांग को लेकर राजभवन शांति मार्च हम के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के नेतृत्व में करीब 11:00 बजे कारगिल चौक, जेपी गोलंबर से होता हुआ आगे बढ़ा | इस क्रम में लगभग पांच छह बार पुलिस के द्वारा बलपूर्वक ब्रीकेटिंग की गई | लेकिन प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में इस राजभवन शांति मार्च में शामिल थे | प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस ने बल का प्रयोग भी किया | इस राजभवन मार्च को द टाइम्स ऑफ इंडिया के अखबार के कार्यालय निकट गोलंबर के पास पुलिस द्वारा रोक दी गई |


श्री मांझी ने कहा कि झुग्गी झोपड़ी में रहने वाली लोगों एवं विस्थापित दुकानदारों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था दिए हुए इस बरसात में जब हम मकड़ी के जाल को भी नहीं हटाते तो उन्हें विस्थापित किए जाने के पहले उनके पुनर्वास की पूरी व्यवस्था सरकार को करनी चाहिए |
श्री मांझी ने कहा कि राज्य सरकार के द्वारा जो अतिक्रमण हटाने का काम चल रहा है लेकिन बिना वैकल्पिक व्यवस्था दिए आज वह गरीब परिवार किस हाल में अपनी जिंदगी जीने के लिए मशक्कत कर रहा है यह काफी मेरे लिए दुखदाई और चिंता का विषय है जिस पर सरकार को विशेष ध्यान देते हुए पुनर्वास की व्यवस्था देनी चाहिए थे लेकिन यह सरकार गरीबों को अपनी जिंदगी जीने से भी रोकने पर आमादा है
जिससे कितने परिवार जिस पर सरकार का कहना है कि यह कार्यवाही माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार किया जा रहा है |
श्री मांझी ने साफ तौर पर कहा है कि हमें माननीय उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय के निर्णय पर किसी प्रकार की टीका टिप्पणी नहीं करनी | लेकिन सरकार द्वारा एक आदेश को अनुपालन करना और दूसरे आदेश पुनर्वास की व्यवस्था की बात कही गई थी उस आदेश को भी सरकार को ध्यान में रखकर पूरा करना चाहिए |


पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मंत्री वृषिण पटेल ने राज्य सरकार से एक सवाल खड़ा करते हुए कहा कि जब दूसरी तरफ माननीय उच्चतम न्यायालय ने एक आदेश दिया था जिसमें कहा गया था कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था किसी गरीब को विस्थापित नहीं किया जाए | तो विस्थापित लोगों के लिए राज्य सरकार क्या व्यवस्था दे रही है | इन्हीं सब सवालों को लेकर मांझी जी के नेतृत्व में राजभवन शांति मार्च निकाली गई हमारी पार्टी गरीबों की लड़ाई लड़ने के लिए ही बनाई गई थी | आगे भी गरीबों की लड़ाई लड़ती रहेगी |


हम के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ दानिश रिजवान ने बताया की इस राजभवन शांति मार्च का नेतृत्व हमारे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के पूर्व मंत्री जीतन राम मांझी ने की | उनके साथ हमारी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मंत्री वृषिण पटेल, पूर्व मंत्री डॉक्टर महाचंद्र प्रसाद सिंह, पूर्व मंत्री डॉ अनिल कुमार, पूर्व विधायक श्री रविंद्र राय ने झुग्गी झोपड़ी व विस्थापित दुकानदारों के मांगों को लेकर आगे भी अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के नेतृत्व में हर लड़ाई लड़ने को तैयार हैं | जब तक की सरकार इनकी 6 सूत्री मांगों को नहीं मान लेती |
डॉ दानिश ने कहा कि हमने महामहिम राज्यपाल महोदय को 6 सूत्री मांगों के साथ ज्ञापन सौंपा सौंपा है जो निम्न प्रकार से है |

      6 सूत्री मांँग :

(पहला):- झुग्गी झोपड़ियों को विस्थापित करने से पूर्व कहीं पूर्णस्थापित स्थापित किया जाए |
(दूसरा):- स्ट्रीट वेंडर्स विधायक 2014 के तहत सभी स्थलों जहां वेंडर्स स्वरोजगार करते हैं को वेंडिंग जोन स्थल निर्धारित किया जाए |
(तीसरा):- वेंडिंग जोन निर्धारित कर या वैकल्पिक व्यवस्था के उपरांत ही फुटपाथ दुकानदारों को हटाने की कार्रवाई की जाए |
(चौथा):- दीघा रेलवे लाइन के किनारे एवं गर्दनीबाग रोड नंबर 11 से 15 तक विस्थापित झुग्गी झोपड़ी वासी को कहीं पुर्नस्थापित किया जाए |
(पांचवा):- पटना शहर के प्रत्येक वार्ड में पांच-पांच वेल्डिंग जोन निर्धारित किया जाए |
(छठा):- शहरों में सेवा प्रदान करने वाले गरीब मजदूर एवं फुटपाथ दुकानदारों के लिए 15{fbd63e9a341f3e3e8d7d6e71db471c9bd21f9ca644b46ebfdd3e2dcdfb61a319} जमीन उपलब्ध कराई जाए|

महामहिम राज्यपाल  को सौंपी गई ज्ञापन

प्रशासन द्वारा अतिक्रमण के नाम पर एवं स्मार्ट सिटी बनाने के उद्धेश्य से पटना शहर के झुग्गी झोपड़ीयों और फुटफाथ दुकानदारों को मानवता को शर्मसार करते हुए बर्बरतापूर्वक बुल्डोजर लगाकर हटाने की कार्रवाई धड़ल्ले से की जा रही है।

1. महोदय सरकार ने ही झुग्गी झोपड़ी वासियों एवं फुटपाथ दुकानदारों को फोटो  पहचान-पत्र, आधार कार्ड, लेबर कार्ड इत्यादि निर्गत की है। सरकार ने ही  इनलोगों के ऑंगनबाड़ी केन्द्र एवं प्राथमिक विद्यालय की स्थापना की है।  इनलोग यहॉं 50 वर्षो से बसे हुए हैं फिर सरकार द्वारा इनलोगों को अवैध  कैसे कहा जा रहा है।

2. झुग्गी झोपड़ी वासी एवं फुटपाथ दुकानदार प्रदेश एवं राष्ट्र निर्माण में अपनी  अहम महत्वपूर्ण सेवा प्रदान करते हैं। झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले मजदूर, रिक्सा  चलाकर, बहुमंजली इमारतों के निर्माण में मजदूरी करके शहरों के सौन्दर्यीकरण  करने में, कुड़ा-कचरा नालों एवं चैम्बरों की सफाईकरने में, बड़े लोगों के घरों  में दाई- नौकर का काम करके वहीं फुटपाथ दुकानदार उचित दर पर चाय-  नाश्ता कराकर, फल-सब्जी बेचकर और मॉंस-मछली बेचकर सुलभ सेवा देते हैं।  भला फुटपाथ दुकानदार नहीं होंगे तो लोग 5 स्टार होटल में चाय नाश्ता करने  जायेगें?

3. फुटपाथ दुकानदार एवं झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले गरीब मजदुर अतिक्रमणकारी  नहीं, स्वरोजगारी है। जनता द्वारा चुनी गई लोकतांत्रिक सरकार द्वारा इनलोगों  के स्वरोजगार को छीना जा रहा है।

4. माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पी0के0कॉल0 ने 1997 में ऑलगा  टेलीस बनाम बाम्बे म्युनिसपलीटी कॉरपोरेशन एवं नवाब खॉं, गुलाब खॉं बनाम  अहमदाबाद म्युनिसपलिटी कारपोरेशन (11 फरवरी 2010.  8904/2009) बिना वैकल्पिक व्यवस्था किये एवं बुनियादी सुविधा दिये  विस्थापन की कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिये हैं। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर  1987 में न्ण्छण्।ण् ने घोषणा किया था अनुच्छेद 11 में जीने का अधिकार,  आवास, शौचालय, पानी इत्यादि बुनियादी सुविधा देने का निर्देश दिया गया है।

5. माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार को सभी राज्य के बेघर लोगों को  31 अक्टूबर 2018 तक सूची उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। ससमय  सूची नहीं देने पर जुर्माना एवं दण्डात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया  है।

6. शहरों को स्मार्ट बनाने वाले, सौन्दर्यीकरण करने वाले व शहरों के निर्माण में  अपना महत्वपूर्ण श्रम देने वाले झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले गरीब मजदूर को  क्या स्मार्ट सिटी में रहने का अधिकार नही है? सरकार को चाहिए स्मार्ट सिटी  न्यायप्रिय हो जिसमें गरीब-अमीर दोनो रह सके दोनो एक दूसरे की जरूरत है।

7. संसद द्वारा स्ट्रीट वेंडर्स विधेयक 2014 पारित की गयी है जिसमें स्पष्ट रूप से  अंकित है कि फुटपाथ दुकानदार बिना भय प्रताड़ना के अपनी व्यवसाय कर  सकते हैं। हॉं जो दुकानदार नियम का उल्लंघन करते है तो उनसे जुर्माना लिया  जाये। उनपर दण्डात्मक कार्रवाई करे लेकिन सभी दुकानदारों का रोजी रोजगार  छिना जाना जायज नहीं है।

8. संविधान के अनुच्छेद में जीवन जीने के अधिकार को सुनिश्चित करती है और  माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने कई ऐसे फैसले दिये जिसमें आवास के अधिकार  को ‘‘जीवन जीने का अधिकार’’ एवं ‘‘जीविको पार्जन के अधिकार’’ जो अनुच्छेद  39 । और अनुच्छेद 41 में उल्लेखित है। पुर्नवास हमारा संवैधानिक एवं  कानूनी हक भी है। निवास एवं बसावट के अधिकार को अनुच्छेद 19 (9) भारत  के किसी कोने में बसने एवं निवास के अनुसार मौलिक अधिकार के रूप में  दिखा जाता है और यह सार्थक जीवन जीने के अधिकार का अविभाज्य हिस्सा  है जो अनुच्छेद 21 में अंकित है।

9. एन0डी0ए0 सरकार ने ही मलिन बस्ती कानून 2011 बनायी है जिसमें स्पष्ट  है कि जहॉं बीस झोपड़ियॉं है उसे स्लम करार किया गया है। जिसे विस्थापित  करने से पूर्व कहीं पुर्नस्थापित करना है। सरकार ने ही वास भूमि नीति बनाई  है जिसके तहत गरीबों को 3 डिसमिल जमीन उपलब्ध कराना है।

10. सरकार ने पटना शहर में 14 वेडिंग जोन निर्धारित की है जनसंख्या के अनुपात  के दृष्टिकोण से पटना शहर के प्रत्येक वार्ड में 5-5 वेंडिग जोन की जरूरत है।  पटना शहर में 72 वार्ड हैं।

इस राजभवन शांति मार्च में झुग्गी झोपड़ी हुआ फुटपाथ दुकानदार से जुड़े आश्रय अभियान के दिलीप पटेल, राजेश कुमार, रुकमणी देवी, राजेश पासवान, मोती साहनी, विक्की कुमार, शाहबुद्दीन जी, मुन्ना जी, आदि आम जनता ने इस राजभवन शांति मार्च में बढ़-चढ़कर भाग लिया |
इस राजभवन शांति मार्च में हम पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता विजय यादव, अनामिका पासवान, श्री अजय यादव, ज्योति सिंह, सुभाष सिंह चंद्रवंशी, रवि भूषण उर्फ बेला यादव, श्याम सुंदर शरण, राजेश गुप्ता, राजीव बलमा बिहारी, अमित पटेल, उपेंद्र सिंह, शैलेश मिश्रा, श्रीमती साधना देवी, रौशन देवी, गीता पासवान, अनिल रजक, राजेश्वर मांझी, भीम सिंह, बसंत कुमार गुप्ता, द्वारिका पासवान, प्रदेश मीडिया प्रभारी अमरेंद्र कुमार त्रिपाठी आदि नेता शामिल थे

 

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